Light in the Darkness: Night and Krishna’s Flute

Love Without Attachment: Can the Heart Follow Dharma

“अंधकार में उजाला: कृष्ण की बांसुरी का रहस्यमय स्वर”

 

कृष्ण की अनेक छवियाँ जो सदियों से भक्तों के हृदय में बसी हैं, उनमें से एक छवि सबसे अलग है, अंधेरी रात, चाँदनी से जगमगाता जंगल, और कृष्ण अपनी बांसुरी को अपने होठों पर उठाते हुए। उस ध्वनि पर, गोपियाँ अपने घर छोड़ देती हैं, नदियाँ अपना प्रवाह रोक देती हैं, और देवता भी मौन हो जाते हैं। प्रश्न उठता है:

 

कृष्ण ने अपनी बांसुरी बजाने के लिए रात को ही क्यों चुना? इसका उत्तर केवल समय और स्थान की कहानी नहीं है; यह प्रेम, समर्पण और आत्मा के ईश्वर के साथ संबंध के गहनतम सत्यों का द्वार है।

 

“कृष्ण रात में बांसुरी क्यों बजाते थे?”
यह विषय आध्यात्मिकता, प्रतीक और मनोविज्ञान — तीनों स्तरों पर गहरा अर्थ रखता है।

रात — शांत मन का प्रतीक

रात का समय बाहर से अंधकार का होता है,
पर भीतर से शांति और स्थिरता का।

 

 

Disadvantages of getting angry

While anger is a natural and normal emotion, expressing it inappropriately or allowing it to escalate can have several disadvantages and negative consequences.

Here are some of the potential drawbacks of getting angry:

 

 

 

 

बांसुरी की धुन मनुष्य के भीतर के स्वर को जगाती है।

दिन के समय जब मन संसार की भागदौड़ में उलझा रहता है, तब वह दिव्य स्वर नहीं सुन पाता।
रात में जब सब कुछ शांत होता है, तब ही मन स्थिर होकर उस दिव्य संगीत को ग्रहण कर सकता है।

 

अर्थात: कृष्ण की बांसुरी रात में इसलिए गूँजती थी,
क्योंकि वह बाहरी नहीं, भीतरी श्रवण का समय था।

अंधकार — अज्ञान का प्रतीक

 

गीता और पुराणों में “रात” केवल समय नहीं, बल्कि अज्ञान (अविद्या) का प्रतीक है।

कृष्ण का रात्रि में बांसुरी बजाना यह संकेत देता है कि —

जब मनुष्य अज्ञान के अंधकार में भटकता है,
तब ईश्वर अपनी बांसुरी (दिव्य पुकार, ज्ञान का स्वर) से उसे जागृत करते हैं।

 

यानी, वह आवाज़ —

“आओ, मेरे पास लौटो” —

ज्ञान की पुकार है जो अंधकार में भी दिशा दिखाती है।

रास और बांसुरी — आत्मा और परमात्मा का संवाद

श्रीमद्भागवत में रासलीला रात्रि में होती है।

यह केवल प्रेम कथा नहीं, बल्कि आत्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है।

कृष्ण की बांसुरी की धुन आत्मा (गोपियाँ) को भीतर से आकर्षित करती है।
रात का अंधकार दर्शाता है कि जब बाहरी जगत सो जाता है, तब अंतर्मन में भक्ति और मिलन का नृत्य शुरू होता है।

 

 

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Staying fit in your 30s and beyond requires a balanced approach that incorporates exercise, nutrition,

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बांसुरी — शून्यता और समर्पण का प्रतीक

बांसुरी स्वयं एक खाली (खोखली) बांस की नली है।
जब तक वह अहंकार से खाली नहीं होती,

तब तक उसमें से कृष्ण का स्वर नहीं निकल सकता।

रात का समय, जब अहंकार और विचार शांत होते हैं,
वह ईश्वर की “वाणी” सुनने का उपयुक्त क्षण है।

 

शास्त्रों में रात्रि

श्रीमद्भागवत पुराण में वर्णन है कि कैसे रात्रि (रात्र्यम्) में, कृष्ण की बांसुरी ने गोपियों को मंत्रमुग्ध कर दिया और उन्हें रासलीला के लिए जंगल में खींच लिया। यहाँ रात्रि अस्त होने का संयोग नहीं है; यह प्रतीकात्मक है। दिन के उजाले में, जीवन कर्तव्यों, पहचानों और सामाजिक व्यवस्था द्वारा शासित होता है।

 

रात में, ये सीमाएँ ढीली पड़ जाती हैं। संसार शांत होता है, और आत्मा वह सुनती है जो वह दिन के शोर में नहीं सुन पाती। इस प्रकार, कृष्ण की बांसुरी केवल एक राग नहीं थी, बल्कि एक पुकार थी जिसे तब सुना जाना था जब बाहरी संसार विश्राम कर रहा हो और आंतरिक संसार जागृत हो रहा हो।

 

 

Natural way to brighten your skin

There are several reasons why your skin may not be glowing, If you’re looking to naturally brighten your skin, there are several ways to enhance your complexion over time. Here are some effective and natural methods:
To get glowing skin, a healthy, balanced diet rich in vitamins, minerals, and antioxidants can help nourish your skin from the inside out. Here are some foods to include in your diet for radiant skin:

Dehydration

Cause: When your skin is dehydrated, it looks dull and lifeless. Proper hydration is key for a healthy, glowing complexion.
Solution: Drink plenty of water and use moisturizers to keep your skin hydrated.

Lack of Sleep

Cause: Insufficient sleep can cause your skin to look tired and dull. Your skin needs rest to repair and rejuvenate itself.
Solution: Aim for 7-9 hours of quality sleep each night to allow your skin to regenerate.

 

 

 

बांसुरी: शून्यता का एक पाठ

बांसुरी स्वयं खोखली होती है। इसकी सुंदरता उसके पास जो है उससे नहीं, बल्कि उसके त्याग से आती है। उसी प्रकार, भक्त को भी शून्य होना चाहिए, अभिमान, अहंकार और आत्म-शोर से मुक्त होना चाहिए—ताकि दिव्य संगीत प्रवाहित हो सके।

रात में बजाई जाने पर, बांसुरी और भी शक्तिशाली हो जाती है। जिस प्रकार अंधकार तारों को दृश्यमान बना देता है, उसी प्रकार रात्रि का सन्नाटा हृदय में दिव्य राग को गुंजायमान कर देता है।

 

गोपियाँ और प्रेम का आह्वान

रात्रि में गोपियों का अपने घरों से निकलना रासलीला का एक केंद्रीय चित्रण है। एक अर्थ में, यह सामाजिक कर्तव्य का उल्लंघन प्रतीत हो सकता है। लेकिन पुराण स्पष्ट करते हैं कि यह आत्मा द्वारा सांसारिक आसक्तियों को त्यागकर प्रेम की उच्च पुकार का प्रतीक है।

 

रात्रि गोपनीयता का आवरण प्रदान करती है, वह आवरण जिसके नीचे प्रेम को मुक्त रूप से व्यक्त किया जा सकता है। भक्ति में भी, सर्वोच्च समर्पण अक्सर सार्वजनिक अनुष्ठानों में नहीं, बल्कि प्रार्थना के गुप्त घंटों में होता है, जब हृदय ईश्वर से एकांत में बात करता है।

What not to do when you have acne

When you have acne, it’s important to avoid certain habits that can make your skin worse or interfere with the healing process. Here are key things not to do when you’re dealing with acne:

Don’t Pick or Pop Pimples

Why: Popping pimples can push bacteria deeper into the skin, leading to more inflammation, scarring, and the potential for more breakouts. It can also spread the infection to surrounding areas.
Tip: If you feel tempted, try using a cold compress to soothe the area instead.https://stories1history.blogspot.com/2025/02/what-not-to-do-when-you-have-acne.html

Don’t Over-Wash Your Face

Why: Washing your face too much or with harsh cleansers can strip your skin of its natural oils, leading to dryness and irritation. When your skin becomes dry, it may overproduce oil, potentially making acne worse.
Tip: Wash your face twice a day with a gentle, non-comedogenic cleanser.

 

 

 

समर्पण के समय के रूप में रात्रि

रात्रि हमेशा से ही भेद्यता का प्रतीक रही है। यह वह समय होता है जब भय सतह पर आते हैं, जब मन कम सतर्क होता है। फिर भी, इसी भेद्यता में समर्पण का अवसर निहित है। रात्रि में कृष्ण की बांसुरी सिखाती है कि जब अहंकार शांत हो जाता है और दिन की भूमिकाएँ फीकी पड़ जाती हैं, तो आत्मा अंततः ईश्वर की पुकार सुन सकती है।

 

पुराण हमें यह भी याद दिलाते हैं कि रासलीला की रात्रि कोई साधारण रात्रि नहीं थी। समय स्वयं झुक गया था, जो घंटों के रूप में दिखाई देता था, वह वास्तव में शाश्वत था। यह शिक्षा गहन है: जब आत्मा ईश्वर से एक हो जाती है, तो एक क्षण भी कालातीत हो सकता है।

 

आज हमारे लिए ज्ञान

एक आधुनिक साधक के लिए इसका क्या अर्थ है?

आंतरिक रात्रि का निर्माण करें: जीवन की व्यस्तता के बीच, मौन, स्थिरता और चिंतन के लिए समय निकालें।

बांसुरी बनें: अहंकार से मुक्त हों और दिव्य प्रेरणा को प्रवाहित होने दें।

पुकार सुनें:  ईश्वर की उपस्थिति हमेशा ज़ोरदार नहीं होती; यह सूक्ष्म होती है, जैसे रात्रि में बांसुरी की धुन। इसे सुनने के लिए शांत होना आवश्यक है।

लालसा को अपनाएँ:  जिस प्रकार गोपियाँ लालसा करती थीं, लालसा स्वयं हमें शुद्ध करती है और ईश्वर के निकट ले जाती है।

 

Garlic is packed with numerous health benefits due to its high content of vitamins, minerals, and antioxidants. Here are some of the key benefits of eating garlic:

Boosts Immune System: Garlic has antimicrobial and antiviral properties that help enhance the immune system, making it more effective at fighting off infections.

Reduces Blood Pressure: Studies have shown that garlic can help lower high blood pressure, which is beneficial for heart health. It contains allicin, a compound known to relax blood vessels and improve circulation.

Improves Cholesterol Levels:  Garlic may help reduce bad cholesterol (LDL) levels and raise good cholesterol (HDL), which can lower the risk of heart disease.

Supports Heart Health:  By lowering blood pressure, improving cholesterol levels, and preventing blood clotting, garlic contributes to better heart health and reduces the risk of cardiovascular diseases.

 

 

 

 

रात्रि में कृष्ण की बांसुरी केवल एक पौराणिक दृश्य ही नहीं, बल्कि एक जीवंत रूपक भी है। यह हमें फुसफुसाती है: जब संसार शांत हो जाता है, जब हम अहंकार और कर्तव्य के शोर को एक तरफ रख देते हैं, जब हम अपनी आंतरिक रात्रि में सुनने का साहस करते हैं, तब हम भी दिव्य पुकार सुन सकते हैं। जब कृष्ण अपनी बांसुरी बजाते हैं तो रात्रि अंधकार नहीं होती। यह वह घड़ी होती है जब आत्मा जागृत होती है।

 

रहस्य का सार

रात = अज्ञान और मौन
बांसुरी = आत्मा की पुकार
कृष्ण = परम चेतना

 

जब बाहरी शोर शांत होता है,
तभी भीतर का संगीत गूँजता है।

इसलिए कृष्ण की बांसुरी रात में बजती थी —
क्योंकि सच्चा संगीत केवल मौन में सुनाई देता है।

 

 

नोट: अँधेरे में उजाला: कृष्ण की बाँसुरी, इस बारे में आपकी क्या राय है? कृपया नीचे कमेंट सेक्शन में हमें बताएँ। आपकी राय हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

 

 

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