समय के पुल पर खड़ा जीवन
इस तस्वीर से जो मैं आज सीखा है। वो मैं आज आप सबके साथ साझा करने जा रहा हूँ
जीवन न तो पीछे रुकता है, न ही आगे भागता है।
वह बस समय के एक पुल पर खड़ा होकर हमें चलना सिखाता है।
इस पुल के एक छोर पर हमारा अतीत होता है —
यादें, अनुभव, गलतियाँ, सीखी हुई बातें।
दूसरे छोर पर होता है भविष्य —
उम्मीदें, सपने, सवाल और अनकही संभावनाएँ।
और इनके बीच खड़ा होता है हमारा वर्तमान —
यही वह जगह है जहाँ जीवन वास्तव में घटित होता है।
क्या आप जानते हैं जब हम किसी बुज़ुर्ग को देखते हैं, तो हमें सिर्फ एक उम्र नहीं दिखती,
हमें समय द्वारा तराशा गया अनुभव दिखता है।
जब हम किसी बच्चे को देखते हैं,
तो हमें सिर्फ मासूमियत नहीं,
बल्कि आने वाले कल की झलक दिखाई देती है।
जीवन हमें सिखाता है कि
सीख अचानक नहीं मिलती।
वह किसी उपदेश की तरह नहीं आती,
बल्कि रिश्तों, मौन और साथ बिताए गए पलों में
धीरे-धीरे हमारे भीतर उतरती है।
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हम अक्सर जीवन को एक प्रतियोगिता समझ लेते हैं —
कौन आगे है, कौन पीछे।
लेकिन सच यह है कि
जीवन कोई दौड़ नहीं,
वह एक निरंतर प्रक्रिया है।
हर उम्र का अपना समय है,
और हर समय की अपनी कीमत।
समय का यह पुल हमें यह भी सिखाता है कि
हर पीढ़ी अधूरी है, अगर वह दूसरी को न समझे।
बुज़ुर्गों के बिना अनुभव अधूरा है,
और बच्चों के बिना भविष्य अर्थहीन।
सबसे सुंदर बात यह है कि
इस पुल पर संवाद शब्दों से नहीं होता।
नज़रों से, मौन से, साथ खड़े होने से
बहुत कुछ कहा और समझा जाता है।
जीवन हमें रोज़ यह मौका देता है कि
हम अतीत से सीख लें,
भविष्य की चिंता कम करें,
और वर्तमान को पूरी संवेदना के साथ जिएँ।
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क्योंकि अंत में,
जीवन कहीं पहुँचने का नाम नहीं,
बल्कि समय के पुल पर चलते हुए
इंसान बनते जाने का नाम है।
क्या आप जानते हैं जीवन एक लगातार चलने वाली यात्रा है, जहाँ
एक पीढ़ी अनुभव लेकर खड़ी होती है
और दूसरी पीढ़ी सवाल और उम्मीदें लेकर
बुज़ुर्ग व्यक्ति जीवन के उस पड़ाव का प्रतीक है जहाँ
सीख बहुत है, शब्द कम हो गए हैं।
बच्चा उस अवस्था का प्रतीक है जहाँ
शब्द कम हैं, पर जिज्ञासा और भविष्य बहुत बड़ा है।
जीवन में सबसे अहम बातें अक्सर बिना बोले समझाई जाती हैं
समय बदलता है, चेहरे बदलते हैं, लेकिन
सीख, संवेदना और रिश्तों की ज़रूरत वही रहती है
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यह हमें याद दिलाती है कि
आज जो बच्चा है, वह कल बुज़ुर्ग होगा
और आज जो बुज़ुर्ग है, वही कभी बच्चे की तरह सीख रहा था
इसलिए जीवन सिर्फ आगे बढ़ने का नाम नहीं,
बल्कि पीछे से मिली सीख को आगे सौंपने का नाम भी है।
“जीवन एक संवाद है” का मतलब यह है कि जीवन सिर्फ घटनाओं की श्रृंखला नहीं,
बल्कि लगातार चलने वाली बातचीत है — हमारे और दूसरों के बीच, हमारे और समय के बीच, और हमारे अपने भीतर।
इसका भाव कुछ इस तरह समझा जा सकता है:
जीवन हमें सवाल पूछता है — परिस्थितियों के रूप में
हम जवाब देते हैं — अपने फैसलों और कर्मों से
कभी हम बोलते हैं, कभी चुप रहकर भी बहुत कुछ कह जाते हैं
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यह संवाद केवल शब्दों से नहीं होता:
बुज़ुर्ग अपने अनुभव से बोलते हैं
बच्चे अपनी आँखों और जिज्ञासा से
समय अपनी सीख से
रिश्ते अपने मौन से
नज़रों, खड़े होने के ढंग और खामोशी में है।
कोई उपदेश नहीं, फिर भी बहुत कुछ कहा जा रहा है।
यानी जीवन हमें सिखाता है कि
जो हम सुनते हैं, वही हमें बनाता है
और जो हम जवाब में करते हैं, वही हमारा जीवन बन जाता है
इस अर्थ में, जीवन हर पल हमसे बात कर रहा है —
सवाल यह है कि हम सुन पा रहे हैं या नहीं।
“समय एक पुल है” का मतलब यह है कि समय हमें अलग-अलग अवस्थाओं, अनुभवों और पीढ़ियों को जोड़ने वाला माध्यम है — न कि सिर्फ गुजर जाने वाली घड़ी।
समय अतीत को वर्तमान से जोड़ता है
और वर्तमान को भविष्य की ओर ले जाता है
हम उसी पुल पर चलते हुए बदलते हैं, सीखते हैं और आगे बढ़ते हैं
बुज़ुर्ग व्यक्ति अतीत का प्रतिनिधित्व करता है — अनुभव, यादें, सीखी हुई बातें
बच्चा भविष्य का — संभावनाएँ, प्रश्न, नई राहें
और उनके बीच जो क्षण है, वही समय का पुल है
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इसका गहरा भाव यह है कि:
हम अतीत में रह नहीं सकते
भविष्य में पहुँच नहीं सकते
लेकिन वर्तमान के इस पुल पर खड़े होकर दोनों से जुड़ सकते हैं
समय एक पुल इसलिए है क्योंकि
उस पर रुकना नहीं होता,
लेकिन उस पर चलते हुए बहुत कुछ समझा और सौंपा जा सकता है
यानी समय हमें सिर्फ आगे नहीं ले जाता,
वह हमें पीछे से मिली सीख को आगे पहुँचाने का अवसर भी देता है।
जीवन में “सीख अचानक नहीं मिलती” का मतलब यह है कि जीवन की असली समझ
एक ही पल में नहीं, बल्कि समय, अनुभव और लगातार महसूस करने से बनती है।
इसे सरल रूप में समझें:
सीख कोई बिजली की तरह अचानक नहीं गिरती
वह धीरे-धीरे जमा होती है —
छोटे अनुभवों, गलतियों, सवालों और चुपचाप देखे गए पलों से
बच्चा उस क्षण में शायद सब कुछ नहीं समझ रहा
लेकिन बुज़ुर्ग के सामने खड़े होने, उसे देखने और महसूस करने से
कुछ भीतर दर्ज हो रहा है, जो आगे चलकर समझ बनेगा
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इसका अर्थ यह भी है कि जीवन में:
कई बातें हमें तब समझ आती हैं
जब उनका समय निकल चुका होता है
और कई सीखें बिना बोले,
हमारे व्यवहार और सोच में उतर जाती हैं
यानी सीख
पढ़ाकर नहीं,
देखकर, सहकर और जीकर मिलती है
इसलिए कहा गया है कि सीख अचानक नहीं मिलती —
वह समय के साथ भीतर पकती है, ठीक वैसे ही जैसे अनुभव से समझ पैदा होती है।
जीवन की जो सीख मिलती है, वह बहुत शांत लेकिन गहरी है।
“हर उम्र की अपनी कीमत होती है” का मतलब यह है कि जीवन का कोई भी चरण
कमतर या बेकार नहीं होता — हर उम्र कुछ खास देती है, जो दूसरी उम्र नहीं दे सकती।
बचपन
→ मासूमियत, जिज्ञासा, सीखने की खुली क्षमता
युवा अवस्था
→ ऊर्जा, सपने, संघर्ष करने की ताक़त
प्रौढ़ अवस्था
→ ज़िम्मेदारी, संतुलन, निर्णय लेने की समझ
बुढ़ापा
→ अनुभव, धैर्य, जीवन की गहराई
बच्चा “कम समझदार” नहीं है
और बुज़ुर्ग “बेकार” नहीं
बल्कि दोनों अपने-अपने समय की सबसे सही जगह पर हैं।
हमें अपनी उम्र से शर्मिंदा नहीं होना चाहिए
न ही किसी और की उम्र को कम आँकना चाहिए
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क्योंकि
जो सीख बचपन में मिलती है,
वह बुढ़ापे में नहीं
और जो समझ बुढ़ापे में आती है,
वह बचपन में नहीं आती
यही कारण है कि हर उम्र की अपनी कीमत होती है —
और जीवन तभी पूरा लगता है, जब हम हर चरण को सम्मान से स्वीकार करते हैं।
“जीवन एक निरंतर प्रक्रिया है, प्रतियोगिता नहीं”
का मतलब यह है कि जीवन को दौड़ या मुकाबले की तरह नहीं,
बल्कि लगातार चलने वाले अनुभव की तरह समझना चाहिए।
जीवन में कोई फिनिश लाइन नहीं होती जहाँ पहुँचकर सब खत्म हो जाए
हर पड़ाव के बाद एक नया चरण शुरू होता है
इसलिए दूसरों से आगे निकलना नहीं,
खुद को धीरे-धीरे समझना और बेहतर बनाना ज़्यादा अहम है
हर किसी की गति अलग होती है
किसी की सीख जल्दी आती है, किसी की देर से
किसी का संघर्ष दिखता है, किसी का नहीं
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अगर जीवन को प्रतियोगिता मानें तो:
तुलना बढ़ती है
बेचैनी बढ़ती है
और वर्तमान पल खो जाता है
लेकिन जब जीवन को प्रक्रिया मानते हैं तो:
धैर्य आता है
स्वीकार भाव आता है
और हर अनुभव से कुछ सीखने की जगह बनती है
यानी जीवन हमें सिखाता है:
जल्दी जीतना ज़रूरी नहीं,
सही तरह जीते जाना ज़रूरी है।
“सीख शब्दों से नहीं, संबंधों से मिलती है” का मतलब यह है कि जीवन की सबसे गहरी समझ सिर्फ किताबों या किसी के कहे हुए शब्दों से नहीं आती, बल्कि लोगों के साथ जुड़े होने, उनके अनुभव को महसूस करने और उनके साथ समय बिताने से मिलती है।
इसे इस तरह समझा जा सकता है:
बुज़ुर्ग का अनुभव: बच्चे को सिर्फ “सिखाने” की बजाय अपनी मौजूदगी, धैर्य और व्यवहार से बहुत कुछ सिखाता है।
बच्चे का सीखना: वह केवल सुनकर नहीं, बल्कि देखकर, समझकर और अनुभव करके सीखता है।
रिश्तों की ताकत: दोस्त, परिवार, शिक्षक—जिनके साथ हम समय बिताते हैं, वे हमारी सोच और समझ पर गहरा असर डालते हैं।
सरल शब्दों में:
जीवन में असली सीखें अक्सर देखने, महसूस करने और अनुभव करने से आती हैं,
न कि केवल सुनने या पढ़ने से।
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