उन लोगों से कैसे निपटें जो आपसे प्यार करने का दिखावा करते हैं
हमारे जीवन में दो तरह के लोग होते हैं: एक जो हमसे प्यार करते हैं, और दूसरे जो हमारे होने के विचार से प्यार करते हैं। अंतर छोटा सा लगता है, लेकिन यही सब कुछ है। एक आपकी जड़ों को सींचेगा; दूसरा सिर्फ़ आपकी छाँव चाहता है। सबसे मुश्किल बात?
दिखावा करने वाले लोग नाम की पट्टियाँ पहनकर कम ही आते हैं। वे दोस्त जैसे दिखते हैं, प्रेमी जैसे लगते हैं, आत्मीय साथी जैसे व्यवहार करते हैं, जब तक कि एक दिन उनका मुखौटा उतर नहीं जाता। रिश्तों के स्वामी और सबसे मानवीय देवता, कृष्ण, “भूत” शब्द के प्रचलन से बहुत पहले ही इसे समझ गए थे।
भगवद् गीता और उसके बाद, उन्होंने हमें दिखाया कि कैसे सत्य को भ्रम से, निष्ठा को प्रदर्शन से अलग किया जाए। अगर आपने कभी किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा विश्वासघात महसूस किया है जिसने आपसे प्यार करने का दावा किया था, तो उनका ज्ञान इसका तोड़ है।
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1. शब्द फीके पड़ जाते हैं, पैटर्न नहीं
कोई भी कह सकता है “मुझे परवाह है।” कृष्ण ने सिखाया कि व्यक्ति का स्वभाव बार-बार किए गए कार्यों से प्रकट होता है। जो आपसे प्यार करता है, वह सिर्फ़ तब नहीं आता जब सब आसान हो, बल्कि तब भी आता है जब सब असुविधाजनक हो। अगर उनका स्नेह उसी क्षण गायब हो जाए जब आप उपयोगी होना बंद कर दें, तो वह प्रेम कभी नहीं था, बस एक लेन-देन था।
2. सच्चा प्रेम देता है, नकली प्रेम खा जाता है
कृष्ण ने मुफ़्त में खुशी दी, लेकिन दूसरों को कभी खुद को पूरी तरह से खत्म नहीं करने दिया। वह जानते थे कि प्रेम शक्ति का स्रोत होना चाहिए, थकावट का नहीं। अगर कोई आपको हर बातचीत के बाद और भी खाली छोड़ जाता है, तो समझ लीजिए: वह आपको प्रेम नहीं दे रहा, बल्कि आपका सुकून छीन रहा है।
3. आसक्ति प्रेम का वेश धारण करती है
कृष्ण ने चेतावनी दी थी, “जहाँ आसक्ति है, वहाँ दुख है।” कुछ लोग आपसे इसलिए चिपके रहते हैं, इसलिए नहीं कि वे आपको संजोते हैं, बल्कि इसलिए कि उन्हें अपना आराम खोने का डर होता है। यह प्रेम नहीं, बल्कि मीठे शब्दों में लिपटी निर्भरता है। प्रेम आपकी आज़ादी का जश्न मनाता है; आसक्ति उसे जकड़ने की कोशिश करती है।
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ऐसे रिश्ते बहुत थका देने वाले और दिल तोड़ने वाले हो सकते हैं, क्योंकि जब कोई दिखावा करता है, तो वो आपके भरोसे, भावनाओं और समय के साथ खेलता है।
1. पहचानना कि ये “प्यार” असली नहीं है
प्यार सिर्फ बातों में नहीं, व्यवहार में होता है।
अगर कोई बार-बार आपको नीचा दिखाए, आपकी जरूरतों को नज़रअंदाज़ करे, या सिर्फ अपने मतलब के वक़्त आपको याद करे — तो ये प्यार नहीं, फायदा उठाना है।
2. उनकी मंशा पर नज़र रखें, शब्दों से ज़्यादा उनके ‘actions’ देखें
क्या वो तब भी आपके साथ होते हैं जब आप कमज़ोर या टूटे हुए होते हैं?
क्या वे आपके लिए सच में कुछ ‘त्याग’ करते हैं या सिर्फ सुविधा मिलने तक आपके आसपास रहते हैं?
— हमेशा।
3. दूरी बनाना सीखें (Emotional boundaries)
जब आपको एहसास हो जाए कि वो सिर्फ दिखावा कर रहे हैं, तो भावनात्मक दूरी बनाना ज़रूरी है।
खुद को बार-बार धोखा खाने से बचाइए। प्यार सिर्फ तब तक प्यार नहीं है जब तक उसमें सच्चाई न हो।
4. साफ़ बात करें
अगर आपमें हिम्मत है और आप closure चाहते हैं, तो उनसे बात करें:
“मुझे ऐसा लग रहा है कि तुम्हारा प्यार एक façade है। क्या तुम सच में मेरे साथ हो या सिर्फ दिखावा कर रहे हो?”
जवाब भले ही टेढ़ा मिले, लेकिन आपको clarity जरूर मिलेगी।
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5. खुद को प्राथमिकता दें
आप किसी का टाइमपास, backup प्लान या emotional sponge नहीं हैं।
अपनी self-respect को प्यार से ज़्यादा अहमियत दें।
क्योंकि सच्चा प्यार कभी भी आपकी self-respect को चोट नहीं पहुँचाता।
6. सीखें, लेकिन कठोर न बनें
ये अनुभव आपको सिखाए, आपको तोड़े नहीं।
आगे किसी नए रिश्ते में जाएँ तो आँखें और दिल दोनों खुले रखें — लेकिन सीखे हुए सबक को कभी न भूलें।
एक छोटा सा सच:
जो लोग प्यार का दिखावा करते हैं, वो अक्सर खुद से भी झूठ बोल रहे होते हैं।
नोट: प्यार में धोखा कब समझें और कब बचें? कृपया हमें नीचे कमेंट सेक्शन में बताएं। आपकी राय हमारे लिए बहुत ज़रूरी है।
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