Travel to Ancient Sculpture and culture of Indonesia

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इंडोनेशिया: प्राचीन हिंदू-बौद्ध संस्कृति की यात्रा

 

इंडोनेशिया की यात्रा एक अविस्मरणीय अनुभव हो सकती है, क्योंकि यह देश प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विविधता और साहसिक गतिविधियों का अनूठा मिश्रण प्रदान करता है। नीचे कुछ प्रमुख कारण दिए गए हैं कि आपको इंडोनेशिया क्यों जाना चाहिए:

 

प्राकृतिक सुंदरता और विविधता

बाली: एक विश्व प्रसिद्ध द्वीप जो अपने खूबसूरत समुद्र तटों, हरी-भरी हरियाली और योग केंद्रों के लिए जाना जाता है।

राजा अम्पैट: दुनिया के सबसे खूबसूरत और समृद्ध समुद्री जीवन द्वीपसमूहों में से एक।

जावा: ज्वालामुखियों, चाय के बागानों और ऐतिहासिक मंदिरों से समृद्ध।

सुमात्रा, कालीमंतन और सुलावेसी: विविध वन्यजीव, वर्षावन और ओरंगुटान देखने का अवसर।

 

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धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत

बोरोबुदुर मंदिर: दुनिया का सबसे बड़ा बौद्ध मंदिर, एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल।

प्रम्बानन मंदिर: एक प्रमुख हिंदू मंदिर परिसर।

सांस्कृतिक नृत्य और स्थानीय रीति-रिवाज, जैसे बाली का केकक नृत्य।

 

स्वादिष्ट और विविध भोजन

नासी गोरेंग, साटे, रेंडांग और गुडेग जैसे इंडोनेशियाई व्यंजन अपने स्वाद और मसालों में अनोखे हैं।

प्रत्येक द्वीप की अपनी विशेषताएँ हैं, जैसे बाली, जावा और सुमात्रा के विशिष्ट व्यंजन।

 

 

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साहसिक और रोमांचक गतिविधियाँ

स्कूबा डाइविंग और स्नॉर्कलिंग: कोमोडो, राजा अम्पैट और बाली में विश्व स्तरीय अनुभव।

हाइकिंग और ट्रेकिंग: माउंट ब्रोमो और माउंट रिंजानी जैसे सक्रिय ज्वालामुखियों पर चढ़ें।

सर्फिंग, रिवर राफ्टिंग, योगा रिट्रीट, और भी बहुत कुछ।

 

अनोखा जीव-जंतु

कोमोडो ड्रैगन: केवल इंडोनेशिया में, विशेष रूप से कोमोडो द्वीप पर पाए जाते हैं।

सुमात्रा और बोर्नियो ओरंगुटान, तेंदुए और दुर्लभ पक्षियों को देखने के लिए आदर्श हैं।

 

किफ़ायती यात्रा

आवास, भोजन, भ्रमण और गतिविधियों की लागत अपेक्षाकृत कम है, खासकर पश्चिमी या यूरोपीय देशों की तुलना में।

 

मिलनसार लोग और आतिथ्य

इंडोनेशियाई लोग बेहद विनम्र और स्वागतशील होते हैं। स्थानीय संस्कृति में, मेहमानों को “देवता” माना जाता है।

अगर आप इंडोनेशिया की प्राचीन मूर्तियों और मंदिरों को देखना चाहते हैं, तो यह आपको हिंदू-बौद्ध संस्कृति के स्वर्णिम युग में ले जाएगा। नीचे, मैंने एक यात्रा गाइड-शैली का विवरण दिया है:

इंडोनेशिया की प्राचीन हिंदू-बौद्ध संस्कृति: एक यात्रा

 

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1. बोरोबुदुर स्तूप (बोरोबुदुर, 9वीं शताब्दी, जावा)

दुनिया का सबसे बड़ा बौद्ध स्तूप।

2,672 पैनलों और 504 बुद्ध प्रतिमाओं से सुसज्जित।

महायान बौद्ध धर्म का प्रतीक।

यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल।

 

 

प्रम्बानन मंदिर (प्रम्बानन, 9वीं शताब्दी, जावा)

 

 

2. प्रम्बानन मंदिर (प्रम्बानन, 9वीं शताब्दी, जावा)

तीन मुख्य मंदिर: शिव, विष्णु और ब्रह्मा।

रामायण की कथाएँ पत्थर पर उकेरी गई हैं।

हिंदू वास्तुकला की एक उत्कृष्ट कृति।

 

3. मेंडुत मंदिर (मेंडुत, जावा)

बोरोबुदुर के पास स्थित बौद्ध मंदिर।

यहाँ एक विशाल बुद्ध प्रतिमा है, जो लगभग 3 मीटर ऊँची है।

ध्यान और पूजा के लिए प्रसिद्ध।

 

4. पेनाटरन मंदिर (पेनाटरन, पूर्वी जावा)

माजापहित साम्राज्य का सबसे बड़ा मंदिर।

भगवान शिव और विष्णु की पूजा का केंद्र।

यहाँ कई मूर्तियाँ और शिलालेख संरक्षित हैं।

 

5. तनाह लोट मंदिर (तनाह लोट, बाली)

समुद्र के बीच चट्टानों पर बना एक हिंदू मंदिर।

भगवान बरुन (समुद्र देवता) को समर्पित।

सूर्यास्त का एक शानदार दृश्य।

 

 

6. बेसाकिह मंदिर (बेसाकिह, बाली)

“बाली के मातृ मंदिर” के रूप में प्रसिद्ध।

यह विशाल मंदिर परिसर बाली का सबसे पवित्र स्थल है।

यहाँ शिव, विष्णु और ब्रह्मा की पूजा की जाती है।

 

7. कैंडी जोलोतुंग (कैंडी जागो, पूर्वी जावा)

माजापहित काल का एक मिश्रित बौद्ध-हिंदू मंदिर।

मूर्तिकला में रामायण और बौद्ध कथाओं का एक सुंदर मिश्रण।

 

 

8. कैंडी सिंगोसारी (जावा)

यह मंदिर राजा कीर्तनेगर की स्मृति में बनाया गया था।

इसमें शिव, अग्नि और बौद्ध देवताओं की मूर्तियाँ हैं।

 

9. गुनुंग कावी (बाली)

शाही चट्टान-कटाई वाले मकबरे मंदिर।

11वीं शताब्दी के एक राजा और रानी का स्मारक।

हिंदू और बौद्ध कला का अद्भुत मिश्रण।

 

10. पुरा उलुन दानु (ब्राटन, बाली)

एक झील के बीच में स्थित, यह मंदिर देवी दानु (जल देवी) को समर्पित है।

जल और कृषि से संबंधित पूजा का केंद्र।

 

यात्रा अनुभव

आपको हर मंदिर और मूर्ति में शिव, विष्णु, बुद्ध और देवी की आराधना की झलक मिलेगी।

मूर्तियों की कला, मंदिरों की भव्यता और संस्कृत शिलालेख आज भी उस काल के भारत और इंडोनेशिया के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंध को दर्शाते हैं।

बाली आज भी हिंदू परंपरा को जीवित रखता है।

यह यात्रा न केवल धार्मिक और ऐतिहासिक है, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव भी है।

 

इंडोनेशिया में प्राचीन हिंदू-बौद्ध सांस्कृतिक काल

इंडोनेशिया का इतिहास केवल समुद्री व्यापार और साम्राज्यों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह हिंदू और बौद्ध संस्कृति से भी गहराई से प्रभावित रहा है। यह प्रभाव भारत से आया और सदियों तक इंडोनेशिया की पहचान का हिस्सा बना रहा।

 

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इंडोनेशिया में प्राचीन हिंदू-बौद्ध सांस्कृतिक काल

1. प्रारंभिक काल (पहली-चौथी शताब्दी ईस्वी)

भारत से व्यापारी और भिक्षु समुद्र के रास्ते इंडोनेशिया पहुँचे।

उन्होंने हिंदू धर्म और बौद्ध धर्म का प्रचार किया।

सुमात्रा और जावा द्वीपों पर सबसे पहले संस्कृत भाषा, वेदों, पुराणों और महायान बौद्ध धर्म का प्रभाव पड़ा।

 

2. श्रीविजय साम्राज्य (7वीं-13वीं शताब्दी)

केंद्र: सुमात्रा (पालेमबांग)

यह एक शक्तिशाली बौद्ध साम्राज्य था।

श्रीविजय ने पूरे एशिया में बौद्ध धर्म का प्रसार किया और नालंदा विश्वविद्यालय के साथ भी घनिष्ठ संबंध बनाए रखे।

इस काल में, इंडोनेशिया में बड़ी संख्या में बौद्ध मूर्तियाँ और स्तूप निर्मित हुए।

 

3. संजय वंश और शैलेन्द्र वंश (8वीं-9वीं शताब्दी, जावा)

शैलेन्द्र वंश → बौद्ध धर्म का संरक्षण।

बोरोबुदुर स्तूप (बोरोबुदुर, जावा) का निर्माण हुआ, जो आज भी दुनिया का सबसे बड़ा बौद्ध स्तूप है।

संजय वंश → हिंदू धर्म का संरक्षण।

प्रम्बानन मंदिर (विष्णु, शिव और ब्रह्मा को समर्पित) का निर्माण हुआ।

 

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4. माजापहित साम्राज्य (13वीं-16वीं शताब्दी)

केंद्र: पूर्वी जावा (त्रोवुलान)

इसे इंडोनेशिया का स्वर्ण युग माना जाता है।

यहाँ हिंदू धर्म और बौद्ध धर्म सह-अस्तित्व में थे।

विष्णु, शिव और देवी-देवताओं की मूर्तियों के साथ-साथ बौद्ध मूर्तियाँ भी बड़ी संख्या में निर्मित की गईं।

हिंदू-बौद्ध संस्कृति का प्रभाव जावा, बाली और सुमात्रा तक फैला।

 

5. हिंदू-बौद्ध से इस्लाम तक (15वीं शताब्दी के बाद)

अरब और गुजराती व्यापारियों के आगमन के साथ इस्लाम का प्रसार शुरू हुआ।

धीरे-धीरे, इंडोनेशिया इस्लामी संस्कृति की ओर बढ़ा।

हालाँकि, बाली द्वीप हिंदू संस्कृति का केंद्र बना हुआ है, जहाँ विष्णु, शिव और देवी की पूजा वैदिक परंपरा से जुड़ी हुई है।

संस्कृति की प्रमुख विशेषताएँ

 

भाषा: संस्कृत का गहरा प्रभाव (आज भी, इंडोनेशियाई शब्दकोश में सैकड़ों संस्कृत शब्द हैं)।

कला: मंदिर वास्तुकला (बोरोबुदुर, प्रम्बानन), मूर्तिकला और कांस्य मूर्तियाँ।

साहित्य: रामायण और महाभारत (काकाविन) के अनुवाद और स्थानीय संस्करण।

धार्मिक जीवन: शिव, विष्णु, ब्रह्मा, बुद्ध और देवी की पूजा।

 

संक्षेप में:

इंडोनेशिया का प्राचीन काल (पहली-सोलहवीं शताब्दी) हिंदू-बौद्ध संस्कृति का स्वर्ण युग था।
आज भी, बाली, जावा और सुमात्रा के मंदिर, मूर्तियाँ और उत्सव इस संस्कृति को दर्शाते हैं।

 

 

इंडोनेशिया में प्राचीन विष्णु प्रतिमाओं का भ्रमण

इंडोनेशिया, विशेषकर जावा और बाली, प्राचीन काल में हिंदू-बौद्ध संस्कृति का एक महत्वपूर्ण केंद्र था। यहाँ आज भी कई स्थानों पर भगवान विष्णु की भव्य और ऐतिहासिक मूर्तियाँ देखी जा सकती हैं।

इंडोनेशिया में प्राचीन विष्णु प्रतिमाओं का भ्रमण

 

1. गरुड़ विष्णु केनकाना, बाली

स्थान: जीडब्ल्यूके कल्चरल पार्क, बाली

विशेषताएँ: यह आधुनिक काल की सबसे भव्य प्रतिमा है, लेकिन यह प्राचीन परंपराओं पर आधारित है।

लगभग 121 मीटर ऊँची, इसे दुनिया की सबसे ऊँची विष्णु प्रतिमा माना जाता है।

यहाँ, विष्णु गरुड़ पर सवार दिखाई देते हैं, जो धर्म और शक्ति का प्रतीक है।

 

2. विष्णु के रूप में ऐरलांग्गा, त्रोवुलान, पूर्वी जावा

स्थान: त्रोवुलान संग्रहालय, पूर्वी जावा

विशेषताएँ: यह मूर्ति राजा ऐरलांग्गा (11वीं शताब्दी) को विष्णु के रूप में दर्शाती है।

इसमें विष्णु को गरुड़ पर विराजमान दिखाया गया है।

यह माजापहित साम्राज्य की हिंदू वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

 

3. प्रम्बानन मंदिर परिसर, जावा

स्थान: योग्याकार्ता, जावा

विशेषता: यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल।

यह मुख्य रूप से शिव को समर्पित है, लेकिन इसके मंदिर परिसर में विष्णु और ब्रह्मा को समर्पित सुंदर मंदिर भी शामिल हैं।

विष्णु मंदिर में भगवान विष्णु की एक प्राचीन पाषाण प्रतिमा आज भी स्थापित है।

 

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4. इंडोनेशिया का राष्ट्रीय संग्रहालय

स्थान: जकार्ता, राजधानी

विशेषता: इसमें प्राचीन जावा, बाली और सुमात्रा से लाई गई कई हिंदू मूर्तियाँ हैं।

यहाँ भगवान विष्णु की दुर्लभ कांस्य और पाषाण प्रतिमाएँ देखी जा सकती हैं।

 

5. कैंडी सुकुह और कैंडी सेथो, सोलो (मध्य जावा)

विशेषता: ये मंदिर 15वीं शताब्दी के उत्तरार्ध के हैं।

यहाँ विष्णु और अन्य हिंदू देवताओं की मूर्तियाँ एक विशिष्ट जावानीस शैली में बनाई गई हैं।

 

यात्रा अनुभव

इंडोनेशिया में इन मूर्तियों का भ्रमण करते समय, आप पाएंगे कि:

प्रत्येक मूर्ति हिंदू दर्शन और स्थानीय जावानीस कला के मिश्रण को दर्शाती है।

मूर्तियों के चेहरों के भाव शांति, दिव्यता और ध्यान की भावना व्यक्त करते हैं।

स्थानीय लोग आज भी विष्णु और अन्य देवताओं की पूजा करते हैं, जो एक जीवंत सांस्कृतिक अनुभव प्रदान करता है।

 

कला विशेषताएँ और शैली

इन मूर्तियों में कुछ सामान्य विशेषताएँ हैं:

कांस्य सामग्री

अधिकांश विष्णु मूर्तियाँ कांसे से बनी होती हैं क्योंकि यह टिकाऊ होती है और मौसम के प्रभाव से बेहतर रूप से सुरक्षित रहती है।

 

स्थित/कमल मुद्राएँ

मूर्तियाँ खड़ी मुद्राओं में या पद्मासन/वीरासन जैसी शांत बैठी हुई मुद्राओं में दिखाई देती हैं।

खड़ी मूर्तियों के हाथों में विभिन्न प्रतीक होते हैं, जैसे शंख, चक्र, गदा, पद्म आदि।

 

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कमल पीठिका/प्रभामंडल/प्रभामंडल

मूर्तियों का पीठिका अक्सर कमल की पंखुड़ी के आकार का होता है।

कई मूर्तियों के पीछे एक चमकदार पृष्ठभूमि (प्रभामंडल या प्रभामंडल) होती है, जो मूर्ति की दिव्यता को बढ़ाती है।

 

अलंकरण

मोती, मुकुट, आभूषण और अलंकृत वस्त्र सभी मूर्तियों की सुंदरता को बढ़ाते हैं।

चेहरे के भाव अक्सर शांत, ध्यानमग्न और आध्यात्मिक होते हैं।

 

वास्तुकला और स्वर-विन्यास

माजापहित शैली में, मूर्तियों को कई भागों में बनाया जाता था और फिर उन्हें जोड़ा जाता था।

अलंकृत मुकुट और विशिष्ट मुद्राएँ मूर्तियों की पहचान हैं।

 

उदाहरण और आधुनिक परियोजनाएँ

गरुड़ विष्णु केनकाना (GWK), बाली: यह हिंदू संस्कृति और मूर्तिकला का एक आधुनिक लेकिन महत्वपूर्ण प्रतीक है। इसमें विष्णु को गरुड़ पर सवार दिखाया गया है।

यह मूर्ति लगभग 121 मीटर ऊँची है।

यह परियोजना 1990 में शुरू हुई और 2018 में पूरी हुई।

 

नोट:- इंडोनेशिया प्राचीन हिंदू-बौद्ध संस्कृति की यात्रा के बारे में आपकी क्या राय है? कृपया नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में हमें बताएँ। आपकी राय हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

 

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