आज के जीवन में मानव और समाज इतना अहंकारी क्यों हो गया है। गीता के अनुसार
गीता के अनुसार मनुष्य के अहंकारी होने के मुख्य कारण अविद्या (अज्ञान), आसक्ति, और देह-अभिमान हैं। आधुनिक जीवन में यह और भी बढ़ जाता है क्योंकि मनुष्य बाहरी उपलब्धियों को ही अपनी पहचान मानने लगता है। नीचे गीता के दृष्टिकोण से विस्तार से समझाया है:
अविद्या (सच्चे स्वभाव को न जानना)
गीता कहती है कि जब मनुष्य अपने आत्मिक स्वरूप को नहीं पहचानता, तब वह अहंकार को ही “मैं” मान लेता है।
गीता 3.27:
“अहंकारविमूढात्मा कर्ताहमिति मन्यते।”
— मोह से ग्रस्त व्यक्ति सोचता है: “सभी कर्म मैं ही करता हूँ।”
आज भी मनुष्य अपनी बुद्धि, पैसा, पद और सामर्थ्य से जो कुछ करता है, उसे अपनी “पूर्ण व्यक्तिगत उपलब्धि” मान लेता है — यही अहंकार का मूल है।
गीता क्यों कहती है कि भय केवल एक भ्रम है
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इन्द्रियासक्ति एवं भोगों की लालसा
इन्द्रियों को तृप्त करने की लालसा मन को बाहरी चीज़ों की ओर खींचती है, और जब उन्हें पाकर गर्व होता है तो अहंकार बढ़ता है।
गीता 16.13–15 में असुर प्रवृत्ति वाले व्यक्ति के अहंकार का वर्णन है:
“मैं यह करूँगा, यह भी मेरा है, मैं इतना शक्तिशाली हूँ…”
आज के जीवन में प्रतिस्पर्धा और भौतिक उपलब्धियाँ इसी प्रकार का अहंकार उत्पन्न करती हैं।
“जब अच्छाई ही बोझ बन जाए” |
देह-अभिमान का बढ़ना
जब मनुष्य शरीर, रूप, शक्ति, जाति, पद, पदवी आदि को ही अपनी पहचान मान लेता है, तो अहंकार स्वाभाविक रूप से बढ़ता है।
गीता 2.71:
जो व्यक्ति “अहम्” और “मम” (मैं और मेरा) की भावना को त्याग देता है, वही शांति को प्राप्त करता है।
आज “मैं कौन हूँ” का उत्तर लोग बाहरी चीज़ों से देने लगे — नौकरी, सोशल मीडिया, प्रसिद्धि, रूप, लाइफस्टाइल — इससे अहंकार गहरा होता है।
गीता जानती है कि हम “सुख नहीं, दुख हमें सिखाता है”
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तुलना और प्रतिस्पर्धा का मनोविज्ञान
गीता बताती है कि जब मनुष्य दूसरों से तुलना करता है—“मैं उससे बड़ा हूँ”—तो यह रजोगुण से उत्पन्न अहंकार है।
गीता 14.17:
रजोगुण से लोभ और कर्म, और उनसे अहंकार उत्पन्न होता है।
आज की दुनिया तुलना पर चल रही है — लाइक्स, फॉलोअर्स, सफलता, अमीरी — इससे रजोगुण अत्यधिक सक्रिय हो जाता है और अहंकार बढ़ता है।
ज्ञान का न होना और आध्यात्मिक मूल्यों का कम होना
गीता सिखाती है कि विनम्रता (अमानित्वम्) ही सच्चे ज्ञान का पहला लक्षण है।
गीता 13.8:
“अमानित्वम् अदम्भित्वम्” — अहंकार और दंभ का अभाव।
जब आध्यात्मिकता कम होती है, तब मनुष्य बाहरी उपलब्धियों से ही स्वयं को परिभाषित करता है और अहंकार बढ़ता है।
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समाधान — गीता का मार्ग
गीता अहंकार को मिटाने के लिए तीन सरल मार्ग देती है:
1. कर्मयोग — कर्म करो, फल पर अधिकार नहीं
जब मनुष्य कर्म को ईश्वरार्पित मानकर करता है, तो अहंकार नहीं टिकता।
2. ज्ञानयोग — आत्मा का सच्चा ज्ञान
अपनी वास्तविक पहचान (आत्मा) जानने पर ‘मैं’ और ‘मेरा’ का भ्रम मिटता है।
3. भक्तियोग — समर्पण
समर्पण से मनुष्य जानता है कि सब ईश्वर की शक्ति से हो रहा है, “मैं करता हूँ” नहीं।
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गीता के अनुसार अहंकार कम करने के उपाय
1. “कर्ता मैं नहीं, ईश्वर है” — कर्तृत्व का त्याग
हर काम करते समय भीतर यह भावना रखें:
“मैं केवल एक साधन हूँ, असली कर्ता परमात्मा है।”
(गीता 3.27)
इससे अपने काम पर गर्व नहीं, कृतज्ञता की भावना आती है।
2. परिणाम की चिंता छोड़कर कर्म करना
(कर्मयोग – गीता 2.47)
आपका अधिकार केवल कर्म पर है, फल पर नहीं।
जब आप फल की अपेक्षा छोड़ देते हैं, अहंकार अपने आप कम हो जाता है क्योंकि आप “मैंने यह हासिल किया” वाली भावना से मुक्त हो जाते हैं।
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3. नम्रता का अभ्यास (अमानित्वम्)
(गीता 13.8)
दैनिक जीवन में:
बोलते समय नम्र भाषा
दूसरों को भी सही सम्मान
“मैं जानता हूँ” की जगह “सीख रहा हूँ” जैसी भावना
दिन में कुछ क्षण जानबूझकर नम्रता का अभ्यास करें—धीरे-धीरे यह स्वभाव बन जाता है।
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4. इन्द्रियों पर नियंत्रण
(गीता 2.58)
इन्द्रियों की दौड़ (भोजन, विलास, सोशल मीडिया, प्रशंसा) अहंकार को बढ़ाती है।
थोड़ा संयम और विवेक—अहंकार को काफी कम कर देता है।
5. तुलना न करना (Comparing Mind को शांत करना)
(गीता 14.17)
“मैं उससे बड़ा हूँ”, “मैं उससे अच्छा हूँ”— यही अहंकार की जड़ है।
तुलना छोड़कर स्व-विकास पर ध्यान दें।
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6. कृतज्ञता का अभ्यास
गीता कहती है—सब कुछ प्रकृति और ईश्वर के सहयोग से होता है।
हर दिन 2–3 चीज़ों के लिए धन्यवाद दें—आप पाएँगे कि गर्व नहीं, विनम्रता बढ़ने लगी है।
7. मन से ‘मैं’ और ‘मेरा’ की पकड़ ढीली करना
(गीता 2.71)
अपने भीतर पूछें—
“क्या सच में यह सब मेरा है? या जीवन ने मुझे कुछ समय के लिए सौंपा है?”
यह विचार धीरे-धीरे अहंकार को पिघलाता है।
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8. सत्संग, ध्यान और जप
(गीता 6 अध्याय)
ध्यान में मन शांत होता है और अहंकार क्षीण होता है।
जप से ‘मैं’ छोटी और ‘ईश्वर’ बड़ी सत्ता अनुभव होती है।
नोट:- Why has today’s man become so arrogant?. के बारे में आपकी क्या राय है? कृपया नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में हमें बताएँ। आपकी राय हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
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Здравствуйте все! Организую поездку в Калининград и меня волнует погодой и купальным сезоном. Кто знает, какая температура моря в Калининграде летом и получится ли купаться в Балтийском море в августе? Также хотелось бы знать, когда запускается сезон в Калининграде и какова обычная температура зимой, чтобы выяснить, стоит ли ехать в студеное время. Буду благодарен за рекомендации и рекомендации по местам, например, стоит ли съездить в Форт 11 или на Янтарный пляж.
Если кто-то продумывал маршрут по Калининграду, посоветуйте, куда лучше податься вечером и какие колоритные улицы стоит непременно увидеть. Интересуют и укрепления Калининградской области, и галереи, особенно Музей янтаря (вот, кстати, важная инфа можно ли купаться в калининграде в сентябре ). Кроме того, для отдыха с детьми в Светлогорске какие объекты и кафе посоветуете? Обязательно мечтаю посетить органный зал в Кафедральном соборе — может кто бывал на концертах?